मोटापा कैसे पैदा होता है ?

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मोटापा कैसे पैदा होता है ?

नब्बे प्रतिशत से अधिक लोगों में मोटापा जरूरत से ज्यादा खाने-पीने से पैदा होता है। हिसाब सीधा-सादा है-दैनिक खपत से कोई जितनी अधिक कैलोरी लेता है, शरीर उन्हें संचय करके रख लेता है। उसके बैंक में जमा हुई कैलोरी आए दिन चर्बी के भंडार में बदल जाती है।

यह भंडार इतना धीरे-धीरे बढ़ता है कि जब उस पर ध्यान जाता है तब तक शरीर बेडौल और बेढंगा हो चुका होता है। कुछ लोग। बिलकुल शुरू में ही चेत जाते हैं, उन्हें यह रोग नहीं लगता। । कुछ लोगों में मसला हॉर्मोनल भी होता है।


स्त्रियों में वयःसाध, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के समय कुदरतन शरीर पर चबी बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। लेकिन सावधान रहकर इससे बचा जा सकता है। किंतु थाइरॉएड ग्रंथि, पीयूष ग्रंथि और यौन ग्रंथियों में से कोई एक यदि ठीक से काम न करे या एड्रिनल ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हॉर्मोन बनाने लगे तो शरीर में आए हॉर्मोनल असंतुलन से भी मोटापा हो जाता है।

ऐसे कारक रोग के नियंत्रण में आने पर मोटापा ऊँटता है। | कई लोग मन से दुखी होने के कारण ही मोटे हो जाते हैं। अपनी मानसिक खिन्नता और असंतोष को मिटाने और तनाव से राहत पाने के लिए वे जरूरत से ज्यादा खाते-पीते हैं और वजन बढ़ा लेते हैं।

कुछ दवाएँ भूख बढ़ा देती हैं, जिससे भी कुछ लोग मोटे हो जाते है। स्टीरॉयड, गर्भनिरोधक गोलियाँ, कुछ ऐंटिबॉयटिक और एलर्जीरोधक दवाएँ, इंसुलिन और मधुमेह में दी जाने वाली सल्फोनीलयूरिया वर्ग की दवाएँ मोटापा पैदा कर सकती हैं।

लेकिन कुछ लोग तो बहुत देखभाल कर खाते-पीते हैं, फिर भी मोटे होते हैं, ऐसा क्यों ?

यह ठीक-ठीक बता पाना मुश्किल है। शायद उनका शरीर इतना कार्यक्षम होता है कि वह कम कैलोरी खर्च करके अधिक काम कर लेता है। कैलोरी कम खर्च होने से थोड़ा खाने पर भी बहुत कैलोरी अतिरिक्त हो जाती हैं और मोटापा बढ़ता जाता है। फिर शायद कोई आनुवंशिक कारण भी हो। कुछ वैज्ञानिकों ने मोटापे का जीन होने की संभावना रखी है, जिसकी जंतु-परीक्षणों में पुष्टि हुई है। पर पूरी सच्चाई अभी सामने आनी बाकी है।

क्या जीवन-शैली में आए परिवर्तनों से भी मोटापा अधिक बढ़ा है ?

हाँ, यह मोटापे का बहुत बड़ा कारण है। आधुनिक जीवन में ऐसे कई परिवर्तन आए हैं जिनके कारण आदमी शारीरिक मेहनत से दूर होता जा रहा है। मशीनीकरण होने से न तो उसे अधिक चलना-फिरना पड़ता है, न मेहनत-मशक्कत करनी पड़ती है।

हर चीज पहले से अधिक हो गई है। मसलन लिफ्ट में वैठिए, बटन दबाए और कितनी ही म एक साथ ‘चढ़’ जाइए। कार, बस, रेलगाड़ी या हवाई जहाज में वे और सैकड़ों-हजारों मील की दूरी कुछ ही घंटों में तय कर लीजिए। तो और, बगैर एक इंच भी हिले-डुले रिमोट कंट्रोल की मदद से हर न के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इच्छानुसार चला लीजिए और बंद कर दीजिए। शारीरिक काम करने की अब जरूरत नहीं रही।

इतना ही बड़ा परिवर्तन खान-पान में भी आया है। हर जगह फास्ट फूड रेस्टोरेन्ट खुल गए हैं। हेमबर्गर बन, फ्रेंच फ्राइज, मीट सैंडविच, तरह-तरह के पीत्ज़ा, चना-भटूरा, समोसे, टिक्की, आलु की चाट जैसी तेल-चर्बी युक्त चीजें, आईसक्रीम, आईसक्रीम सोडा हर जगह मिलने लगी हैं। सुविधा और स्वादिष्टता के कारण ये लोगों में खूब लोकप्रिय भी हुई हैं। इनमें कैलोरी ठूस-ठूस कर भरी हैं जिनसे पूरा गणित गड़बड़ाए बिना नहीं रह पाता।



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I am Living in Delhi and I am a Medical Student.
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