मलेरिया के लक्षण कारण इलाज दवा और उपचार

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मलेरिया के कारण, लक्षण, उपचार व बचाव : Causes, symptoms in of Malaria in hindi

 

मलेरिया एक तरह का मच्छर के काटने से होने वाला  बुखार है |यह वर्षा ऋतू में अधिक फैलता है | विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार 50 करोड़ से ज्यादा लोग  मलेरिया के कारण प्रभावित होते है और इनमे से  लगभग 28 लाख लोगों की मत्यु हो जाती है | और अगर हम अपने भारत की बात करें तो  भारत में भी हर साल इस बीमारी से करीब 20 से 25  लाख लोग प्रभावित होते है और  जिनमें से ज्यादातर बच्चे होते है |इसीलिए  Malaria के प्रति सचेत रहने और आम लोगों में इसके प्रति जागरुकता फैलाने के लिए विश्व भर में प्रतिवर्ष ’25 अप्रैल’ को ‘विश्व मलेरिया दिवस’ मनाये जाता है

Malaria Fever Causes in Hindi | मलेरिया बुखार के कारण

 

Malaria Fever एक विशेष प्रकार की 4 Plasmodium परजीवी / parasite के प्रजाति के कारण होता हैं।

  1. Plasmodium Vivax
  2. Plasmodium Falciparum
  3. Plasmodium Malarie
  4. Plasmodium Ovale

Malaria Fever Causes in Hindi | मलेरिया बुखार के कारण

Malaria Sign and Symptoms in Hindi | मलेरिया बुखार के लक्षण

Malaria Test in Hindi | मलेरिया बुखार की  जाँच

मलेरिया से बचाव के उपाय :

मलेरिया में क्या खाएं क्या ना खाएं 

मलेरिया से बचने के घरेलू तरीके (Malaria Home remedies in Hindi)

Ayurvedic medicine of Malaria in Hindi | मलेरिया की आयुर्वेदिक दवा

Allopathic Medicine of Malaria in Hindi | मलेरिया की अँग्रेजी दवा

 

भारत में ज्यादातर मलेरिया के संक्रमण Plasmodium Vivax और Plasmodium Falciparum के कारण ही होता हैं। इनमे से Plasmodium Falciparum ज्यादा खतरनाक होता है, यहाँ तक की इसमें रोगी की मृत्यु भी हो सकती है ।

जब किसी व्यक्ति को मलेरिया संक्रमित मच्छर कांटता हैं , तो उसमे मौजूद Plasmodim परजीवी अपना Sporozoite infection Blood में लार के रूप में छोड़कर व्यक्ति को infected कर देता हैं। शरीर में प्रवेश करने के आधे घंटे के अंदर यह परजीवी व्यक्ति के लिवर को संक्रमित कर देता हैं। लिवर के भीतर मलेरिया को फैलाने वाले छोटे जीव Merozoites बनने लगते हैं। यह Merozoites लिवर से रक्त में फैलकर लाल रक्त कोशिकाओ को प्रभावित कर तेज गति से बढ़ जाते हैं जिससे लाल रक्त कण टूटने लगते हैं और व्यक्ति को Malaria हो जाता हैं।

Malaria Sign and Symptoms in Hindi | मलेरिया बुखार के लक्षण

मलेरिया रोग के लक्षण संक्रमित मच्‍छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद रोगी में दिखना प्रारम्भ हो जाता हैं। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की एक मलेरिया के रोगी में दिए गए सभी लक्षण नजर आए।  मलेरिया बुखार के लक्षण कुछ ऐसे होते हैं —

    • तेज बुखार (104-105 F) जो की 2-7 दिन तक लगातार रहना
    • फिर गर्मी लगकर तेज बुखार होना।
    •  पसीना आकर बुखार कम होना व कमजोर महसूस करना।
    • अचानक सर्दी लगना
    •  साँस लेने में तकलीफ महसूस होना ।
    •  हाथ-पैर में ऐठन
    • कमर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
    •  मिचली nausea, उल्टी vomiting आना या महसूस होना
    • शरीर पर लाल-गुलाबी चकत्ते red rashes होना
    •  आँखों लाल रहना ,आँखों में दर्द रहना
    • भूख न लगना, खाने की इच्छा में कमी,
    • मुँह का स्वाद ख़राब होना,
    • पेट ख़राब हो जाना
    •  हमेशा थका-थका और कमजोरी महसूश करना
    • ज्यादा बढ़ने पर रोगी बेहोश भी हो सकता है |
    • एनीमिया हो जाना।


मलेरिया बुखार को तीन स्टेज में medical science में देखा जाता है:
कोल्ड स्टेज (Cold Stage): इस दौरान रोगी को तेज ठंड के साथ कपकपी होती है।
हॉट स्टेज (Hot Stage): इस दौरान रोगी को तेज बुखार, पसीने और उलटी आदि की शिकायत हो सकती है।
स्वेट स्टेज (Sweat Stage): बुखार के साथ-साथ मरीज को काफी पसीना आता है।

Malaria Test in Hindi | मलेरिया बुखार की  जाँच

  1. रक्त की माइक्रोस्कोप जांच (Peripheral Smear for Malarial Parasite) : इस जाँच में संक्रमित व्यक्ति का खून एक काँच की स्लाइड  पर लेकर माक्रोस्कोप  से मलेरिया वीसाणु  की जाँच की जाती है । अगर कोई व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित हो तो उसका Test result positive आता है । लेकिन कभी-कभी मलेरिया के परजीवी रक्त लेते समय रक्त में न रहकर लीवर में रहने के कारण मलेरिया होते हुए भी यह जांच Negative आ सकती हैं ।
  2. कार्ड टेस्ट (Rapid Test) : इस जाँच के अन्तर्गत मलेरिया संक्रमित व्यक्ति के रक्त से serum अलग कर कार्ड पर डाला जाता हैं। अगर serum में Plasmodium परजीवी के antigen मौजूद रहते है तो यह सुनिशचित हो जाता है की आप मलेरिया बुखार से संक्रमित हो ।
  3. Test : PCR का मतलब Polymerase Chain Reaction Test होता है ,इस जाँच से भी मलेरिया का संक्रमण है या नहीं यह सुनिश्चित किया जाता है ।
  4. CBC टेस्ट– इस जांच को मलेरिया के केश मे Haemoglobin का पता करने और Platelets का पता करने के लिए कराया जाता क्योंकि मलेरिया के मरीज को अनेमिया होने का ज्यादा डर रहता है और साथ ही साथ उसके प्लेटलेट्स 1.5 लाख से कम होने का भी खतरा बना रहता है।

मलेरिया से बचाव के उपाय :

  • बच्चो को मच्छरदानी या महीन (पतले) कपड़े के नीचे सुलाएँ।
  • मच्छरों से बचें। वहां सोएं जहां मच्छर न हों या कपड़ा ओढ़कर सोएँ।
  • घर के आसपास गड्ढों तथा पानी के इकट्ठा होनेवाले स्थानों को पाट दें।
  • छत की टंकी, टेंक, कूलर इत्यादि का पानी बदलते रहें। सप्ताह में एक बार जरूर बदलें। इससे भी मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाई जा सकती है।
  • खुले स्थानों पर जहाँ पानी हटाना संभव न हो वहाँ जला हुआ खनिज तेल या मिट्टी का तेल डालें। इससे मच्छर के लावा उत्पन्न नहीं होंगे।
  • पानी की निकासी की सही व्यवस्था करें। जहाँ तक संभव हो अंडर ग्राउंड निकासी की व्यवस्था करें। साफ-सफाई के लिए फिनाइल इत्यादि का प्रयोग करें।
  • शरीर पर सरसों का तेल लगाएँ। इससे मच्छर नहीं काटते।
  • मच्छरों और लार्वा को खत्म कर दें। मच्छर रुके हुए पानी में पैदा होते हैं। आस-पास के टूटे हुए बरतनों को हटा दें। तालाब या दलदल को साफ करें या उन पर थोड़ा सा तेल डालें।
  • घर के आसपास गड्ढों तथा पानी के इकट्ठा होनेवाले स्थानों को पाट दें।
  • छत की टंकी, टेंक, कूलर इत्यादि का पानी बदलते रहें। सप्ताह में एक बार जरूर बदलें। इससे भी मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाई जा सकती है।
  • खुले स्थानों पर जहाँ पानी हटाना संभव न हो वहाँ जला हुआ खनिज तेल या मिट्टी का तेल डालें। इससे मच्छर के लावा उत्पन्न नहीं होंगे।
  • पानी की निकासी की सही व्यवस्था करें। जहाँ तक संभव हो अंडर ग्राउंड निकासी की व्यवस्था करें। साफ-सफाई के लिए फिनाइल इत्यादि का प्रयोग करें।
  • कीटनाशकों का छिड़काव मच्छर पैदा होने वाले स्थानों में तथा घरों में करवाएँ। आजकल डी.डी.टी., बी.एच.सी. की जगह पाइरेथाइड का छिड़काव किया जाता है, जो बहुत असरकारक है (लेकिन इससे सावधानी भी रखें )
  • लार्वा वाली जगहों पर टेमीफास या मेलाथियान डालकर लार्वा नष्ट किए जा सकते हैं।
  • मच्छरदानियों का उपयोग-आजकल दवायुक्त मच्छरदानियाँ भी उपलब्ध हैं। इनका प्रयोग कर मच्छरों से बचा जा सकता है।
  • खिड़की-दरवाजों पर मच्छर जालियाँ लगवाएँ।
  • नीम की पत्तियों का धुआँ या नीम का तेल जलाकर मच्छरों को दूर रखें। पाइरेथम के धुएँ से भी मच्छर नष्ट हो जाते हैं।
  • वैसे आजकल कीटनाशक धुआँ उत्पन्न करनेवाले पदार्थ, मेट इत्यादि आते हैं। लेकिन ये नुकसानदायक होते हैं। अत: प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग अधिक बेहतर होता है।
  • मच्छर रोधी क्रीम लगाकर भी मच्छरों को शरीर से दूर रखा जा सकता है।
  • रोग की पहचान के बाद उसे जड़ से दूर करने के लिए उसका पूरा इलाज लेना चाहिए। मलेरिया का इलाज बहुत कठिन नहीं है। जाँच के बाद सही दवाई की सही मात्रा ली जाए तो रोग जड़ से ठीक हो जाता है, लेकिन दवाई की पर्याप्त मात्रा न लेने से अकसर मलेरिया क्लोरोक्विन से प्रतिरोधी हो जाता है तब अन्य प्रभावी दवाइयाँ लेनी होती हैं।
  • याद रखें मच्छरों पर नियंत्रण ही मलेरिया पर नियंत्रण है। मच्छरों की जनसंख्या पर नियंत्रण- मच्छर रोग के परजीवियों के वाहक होते हैं। अत: बेहतर है कि इन्हें पनपने से रोका जाए।
  • Malaria रोग के मच्छर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। अंडे से लार्वा , फिर प्यूपा का निर्माण होता है और प्यूपा से मच्छर तैयार होते हैं। इस प्रक्रिया में 9 से 11 दिन लगते है
  • ऐसे क्षेत्रों में जहाँ मलेरिया बहुतायत से होता है, वहाँ के व्यक्ति डॉक्टर की सलाह से थोड़ी सी दवाइयाँ खाकर मलेरिया बुखार के प्रकोप से बचे रह सकते हैं। इसलिए जिस परिवार, गाँव या क्षेत्र विशेष में रोग अधिक हो वहाँ के व्यक्ति ये दवाइयाँ अवश्य लें। दवाएँ शासकीय चिकित्सालयों में नि:शुल्क दी जाती हैं।

मलेरिया में क्या खाएं क्या ना खाएं  

इलाज के साथ – साथ malaria के मरीज के खान – पान का भी विशेष ध्यान रखना जरुरी होता है | इसलिए समय पर दवा खिलाएं |

  • सबसे पहले तो malaria के मरीज के शरीर में पानी की कमी न होने दें |
  • Malaria होने पर संतुलित और पौष्टिक भोजन की अत्यन्त आवश्यकता होती है मरीज के खाने – पीने में तनिक भी असावधानी नहीं होनी चाहिए | मरीज को हल्का खाना खाने को दें | इस बात का विशेष ध्यान रखे कि उसका भोजन ज्यादा भारी न हो | मरीज को आप खिचड़ी, दलिया, सूजी, चपाती, दाल, सूप, पनीर, हरी, पीली सब्जियाँ, फल आदि खाने को दें | इससे पाचन ठीक रहता है और उर्जा भी मिलती है |
  • जिस समय ठंड से बुखार तीब्रता की ओर बढ़ता है उस समय malaria के रोगी को भोजन नहीं देना चाहिए |

मलेरिया में क्या ना खाएं:

  • भारी,तले, मिर्च-मसालेदार चीजें भोजन में न खाएं।
  • मांस, मछली, अंडा न खाएं।
  • फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम, ठंडी तासीर की चीजें सेवन न करें।
  • शराब न पिएं।
  • शरीर को ठंड न लगने दें। अधिक मेहनत वाला कार्य न करें।

मलेरिया से बचने के घरेलू तरीके (Malaria Home remedies in Hindi)

  • पिसी हुई काली मिर्च और नमक को नींबू में लगाकर मलेरिया के रोगी को चूसने को दें। एैसा करने स बुखार की गर्मी उतर जाती है।
  • गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिलाकर 40-80 मिलीलीटर की मात्रा में रोज सेवन करने से मलेरिया में लाभ होता है ! यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, इम्युनिटी और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।
  • मलेरिया के बुखार होने पर प्याज का रस बेहद फायदेमंद होता है। 4 काली मिर्च का पाउडर, 4 मिली प्याज का रस मिलाकर दिन में 3 बारी पीएं।
    प्याज के रस में एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीते रहने से भी मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
  • हरड़ का चूर्ण (10 ग्राम) को 100 मिलीलीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना ले। यह काढ़ा दिन में 3 बार पीने से मलेरिया रोग में फायदा होता है।
  • लहसुन की 4 कलियों को छीलकर घी में मिला लें और इसका सेवन करें। एैसा करने से मलेरिया की ठंड उतर जाती है।
  • मलेरिया बुखार के लिए गिलोय, पपीता पत्ते, एलोवेरा/मुसब्बर वेरा का रस और बकरी का दूध देना लाभप्रद होता है।
  • ढाक : ढाक के बीजों की गिरी (10 ग्राम) और करंजवा के बीजों के गिरी (10 ग्राम) को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुखा लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले यह 1 गोली पानी के साथ लेने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
  • सुबह-सुबह खाली पेट तुलसी के 4 से 5 पत्तों को अच्छि तरह से चबाकर खाएं । 10 ग्राम तुलसी के पत्तों और 7 काली मिर्चों को पानी में पीसकर सुबह और शाम पीने से मलेरिया बुखार ठीक होता है ।
  • सौंठ और पिसा धनिया को चूर्ण बराबर मात्रा में पानी के साथ लेने से भी मलेरिया बुखार में आराम मिलता है ।
  • 10 ग्राम गरम पानी और उसमें 2 ग्राम हींग डालकर उसका लेप बनाएं। अब इस लेप को हाथ और पैरों के नाखूनों पर लगाएं। 4 दिनों तक एैसा करने से रोगी जल्दी ठीक हो जाता है।

Ayurvedic medicine of Malaria in Hindi | मलेरिया की आयुर्वेदिक दवा

  • महा सुदरशन चूर्ण के घन्सत्व से बनी गोलॊ का उपयोग दिन में चार बार करें
  • विषमज्वरातंक लौह, आनंद भैरव रस, आरोग्यवर्धनी वटी, अपमंगल रस, चंद्रप्रभा गोल्डन। इन पांचों गोलियों को सुबह-शाम खाने के बाद खाएं।
  •  गिलोय, लाल चंदन, सौंठ, तुलसी, मुलैठी व पीपल आदि का चूर्ण या पाउडर बनाकर सुबह और शाम 3 ग्राम की मात्रा में पानी से लेना रोगी के लिए लाभदायक होता है।
  • आयुष-चौंसठ : आयुष-चौंसठ दवा विशेषकर मलेरिया के उपचार के लिए प्रयोग में ली जाती है। यह कैप्सूल के रूप में होती है जिसे मरीज को इलाज और बचाव दोनों के लिए देते हैं।
  •  सप्त पर्ण बटी
  • नीम या सप्तपर्ण पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर भी पीया जा सकता है। इसके लिए 10 ग्राम छाल को आधा गिलास पानी में 1/4 होने तक उबालें और छानकर गुनगुना पिएं।

Allopathic Medicine of Malaria in Hindi | मलेरिया की अँग्रेजी दवा

मलेरिया के दवाओ में निम्नलिखित दवाएं शामिल है —

1- Plasmodium vivex

मलेरिया Plasmodium vivex के केश मे Chloroquine नामक मेडिकसन दी जाती है जो कई सारे नामों से मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती है जैसे- Lariago-DS,Lariago,Chloroquine Phosphate, Reshochin, mailarid  इत्यादि।

Dose- Chloroquine phospahtase (Lariago-DS) मलेरिया होने पर पहले दिन 10mg/KG के हिसाब से दूसरे दिन भी 10mg/KG के हिसाब से और तीसरे दिन 5mg/KG के हिसाब से 14 days तक  लेनी चाहिए। और ध्यान रखें इस medicine के side effect भी होते हैं तो इस मैडिसिन को लेने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

2-Plasmodium Falciparum

मलेरिया Plasmodium Falciparum के केस मे chloroquine नहीं दी जाती है क्योंकि falciferam मलेरिया के केस मे chloroquine resistent होती है जिसे लेने से कोई भी लाभ नहीं मिलता है ऐसे केस मे Match Plus 4X की टेबलेट दे सकते हैं अगर आपको match plus 4x नहीं मिलती है तो आप इसकी composition बताकर दूसरी टेबलेट ले सकते हैं इसमे  Artemether 80MG और Lumefantrine 480MG होता है। और इस टबलेट को हमेसा दूध के साथ लेना चाहिए क्योंकि अगर इसे पानी के साथ लेने पर अक्सर रोगी की उल्टी हो जाती है। Plasmodiam Falciferum के लिए और भी कई मैडिसिन का प्रयोग किया जाता है जैसे- Artinat 100 Kit or Larinate 100 kit (Artesunate 50mg+sulphadoxine 500 & Pyrimethamine 25mg)

Dose- Artemether 80MG and Lumefantrine 480MG (Match Plus 4X ) इसका एक टेबलेट सुबह नस्ता करने के बाद दूध के साथ लेना होता है और दूसरा उसके 8 घंटे के बाद दूध के साथ लेना होता है और उसके बाद फिर 12-12  घंटे के  अंतराल  पर एक-एक टेबलेट्स 3 दिन तक  लेना होता है।और दूसरे दिन के dose के साथ Primaquine tab 0.75/kg के हिसाब से एक सिंगल dose भी  लेना चाहिए।

3.मिक्स मलेरिया  Plasmodium vivex & falciparum जब दोनों एक साथ हो जाते है तो उस केश मे सबसे पहले Plasmodium Falciparum का इलाज किया जाता उसके बाद Vivex मलेरिया के टेस्ट किया।

 

नोट- उपर दी हुई किसी भी मैडिसिन को लेने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले। 

 

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