निमोनिया Pneumonia के लक्षण कारण और इलाज क्या है ?

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निमोनिया क्या है ?What is Pneumonia?

निमोनिया Pneumonia का आतंक ही कुछ ऐसा रहा है कि आज भी इसके उल्लेख से मन काँप उठता है। सच यह है। कि आधुनिक ऐटिबायटिक युग में इसका इलाज मुश्किल नहीं है। इसलिए इसका रूप पहले से बहुत बदल गया है और पूरे इलाज से अधिकतर रोगियों का जीवन बचाया जा सकता है। यद्यपि बच्चों में जरा सी असावधानी से बात बिगड़ते देर नहीं लगती। पहले से बीमार और दुर्बल लोगों में भी यह प्राणलेवा हो सकता है। YouTube

निमोनिया क्या
होता है ?

यह फेफड़े की शोथ है, जो प्रायः किसी वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण से उत्पन्न होती है। इसमें फेफड़े के किसी एक या अधिक भाग की वायुकोष्ठिकाएँ (ऐल्वीओलाई) सूज जाती हैं और जैसे पानी से भर जाती हैं। ऐसा होने पर ये श्वास-प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पातीं। वायरस या बैक्टीरिया की संख्या फेफड़े में तेजी से बढ़ती जाती है, जिससे बुखार आ जाता है, छाती में दर्द हो सकता है और खाँसी उठने लगती है। ऐंटिबायटिक दवाओं से रोग जल्द नियंत्रण में आ जाता है, पर निदान में देर हो जाए तो हालत गंभीर भी हो सकती है।

निमोनिया रोग कैसे पैदा होता है? Causes Of Pneumonia?

ज्यादातर मामलों में रोग की शुरुआत साधारण सदा खराब होने से होती है। मुँह, नाक, गले में पैठ करने वाले या बैक्टीरिया मौका पाते ही श्वास-नलियों की बचाव-प्रणाली चकमा दे जाते हैं और वायुकोष्ठिकाओं पर धावा बोल देते हैं। कुछ मामलों में संक्रमण सीधा हवा से आए वायरस और बैक्टीरिया से भी हो जाता है, और कुछ में शरीर के अन्य किसी अंग से खून के रास्ते रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया फेफड़े में पहुँच जाते हैं।

सामान्य स्वास्थ्य वाला निमोनिया पैदा करने वाले बैक्टीरिया व्यक्ति प्रायः इन संक्रमों के घेरे में कम ही आता है, पर शरीर जरा दुर्बल हुआ नहीं कि यह संक्रमण निमोनिया में बदल जाता है।

निमोनिया कैसे पनपता है? How to Develop Pneumonia ?

यह दुर्बलता कई प्रकार की हो सकती है। बिगड़ी हुई डायबिटीज, कपोषण, मदिरा का व्यसन, गुर्दो की खराबी, लंबे समय से चली
बीमारी, हाल में हुआ ऑपरेशन, कैंसर के लिए दी जा रही ३ एच.आई.वी. संक्रमण आदि बहुत सी स्थितियाँ हैं जिनमें की रोग-बचाव ताकत कम हो जाती है और निमोनिया के रिया-वायरस को पैर जमाने का मौका मिल जाता है। (टीबी का इलाज़ )
ब्रोंकाइटिस होने पर या धूम्रपान की आदत होने पर -नलियों की रोग-बचाव ताकत कमजोर हो जाती है। कॉनिक ब्रोंकाइटिस के मरीजों और धुम्रपान करने वालों निया के मामले अधिक होते हैं।

निमोनिया के क्या लक्षण होते हैं ? Symptoms Of Pneumonia?

अचानक ही उड़ देकर बुखार आता है। यह वखार लात रहता है, बीच में कम नहीं होता। खासी होती है, जिसमें हा पीला या हरा बलगम निकलता है। छाती में दर्द भी हो सकता है। साँस तेज गति से चलने लगती है। छोटे बच्चों में यह लक्षण खासकर देखने में आता है, यद्यपि ऐसी स्थिति में उनमें साँस-नलियाँ की सिकुड़न भी हो जाती है। इलाज जल्द शुरू न होने पर मरीज की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है। उसमें बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है, बुखार और तेज हो जाता है और छाती में भी दर्द बढ़ जाता है। कुछ मरीजों के बलगम में खून भी आ जाता है। (मोटापा को जड़ से खत्म करें)

निमोनिया को कैसे पहचाना जाता है ?How to Diagnosis Pneumonia?


रोगी के लक्षण और शारीरिक जाँच के परिणाम ही इसका शुबहा जगा देते हैं। रही-सही पुष्टि छाती के एक्स-रे से हो जाती है। इसमें निमोनिया की किस्म का भी अंदाजा लग जाता है। फिर भी खून और बलगम की जाँच कराने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है।

निमोनिया का इलाज क्या है ? Treatment Of Pneumonia?

उपचार का मुख्य आधार ऐटिबॉयटिक होते हैं। इनका चयन संभावित या जाँच के आधार पर सिद्ध हो चुके संक्रमण के अनुरूप किया जाता है। संक्रमण पर जल्द विजय हासिल करने के लिए कई मामलों में ऐंटिबॉयटिक नस से टीके के जरिए दिये जाते हैं। (आधे सिर के दर्द का इलाज़)

बुखार उतारने के लिए दवा दी जाती है। जैसे पेरासिटामोल या निमूलिड। साँस की नलियों में सिकुड़न होती है तो उसे दूर करने के लिए ब्रोंकोडाइलेटर दवा देते हैं। ऑक्सीजन भी दी जाती है। जब तक हालत नहीं सुधरती, नस से ग्लुकोस भी दिया जाता है ताकि शरीर को पानी और पोषण मिलता रहे। आम तौर से ऐंटिबॉयटिक का असर चौबीस से बहत्तर घंटों में दिखने लगता है।

ज्वर कम होते ही स्थिति में सुधार शुरू हो जाता है। लेकिन ऐंटिबॉयटिक दवा की डोज में जरा असावधानी नहीं बरतनी होती। यह दवा दस से चौदह दिन तक चलती है। | छाती में दर्द हो तो उसे दूर करने के लिए गर्म पानी की बोतल का सेंक और दर्द-निवारक दवा लेना आराम दिलाता है। | खाँसी से छाती में तकलीफ महसूस हो सकती है। पर उसे दबाने की कोशिश करना गलत है। जितना बलगम निकल सके, उतना ही अच्छा है। जिस समय खाँसी उठे, उस समय मरीज की देखभाल कर रहा व्यक्ति यदि हाथ से उसकी छाती को सहलाकर सहारा दे सके तो इससे मरीज को राहत पहुँचती है। दर्द कम होता है।

ज्यादातर मामलों में सात से दस दिनों में स्थिति बिलकुल सँभल जाती है और रोगी पहले से काफी स्वस्थ अनुभव करने लगता है। । जिन मामलों में निमोनिया दूसरे किसी रोग की आड़ में उत्पन्न होता है, उनमें उस रोग का सही इलाज होना भी बहुत जरूरी होता है।


क्या इस इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है ?

मरीज की हालत पर निर्भर करता है। कम गंभीर मामलों में घर पर नियम से दवा देकर भी रोग का इलाज हो सकता है।





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