Polio: पोलियो के लक्षण, कारण, टेस्ट, बचाव, इलाज़ और घरेलू उपचार

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पल्स पोलियो के खाश अभियान के बावजूद पोलियो आज भी प्रगतिशील और पिछड़े देशों के डॉक्टरों के लिए चुनौती बना हुआ है

हर साल हजारों की तादाद में बच्चे इससे पीड़ित होते हैंकुछ प्राणों से ही हाथ धो बैठते हैं, पर उससे कहीं अधिक जीवनभर के लिए अपंगु हो जाते हैं

उनकी एक या दोनों टाँगें कमजोर हो जाती हैं और उनका ठीक से विकास नहीं हो पाता

कुछ में विकृति इतनी अधिक हो जाती है कि पैरों पर चल पाना एक सपना बनकर रह जाता हैहाँ, बैसाखियों, विशेष जूतों, दूसरे उपकरणों और कुछेक मामलों में समय से ऑपरेशन कर बच्चे के जीवन में आत्मनिर्भरता लाई जा सकती है

पर समझदारी बचाव में ही हैउन्नत देशों की ही तरह अपने देश में पोलियो जड़ से खत्म करने  का सपना कब साकार होगा, इसकी प्रतीक्षा है

 

पोलियो क्या है ? What is Polio?

यह खास किस्म के आर.एन.. वायरस से होने वाला रोग हैइसमें मेरुरज्जु (Spinal Cord) का वह हिस्सा जिससे मांसपेशियों को ताकत मिलती है। वो क्षतिग्रस्त हो जाता है। जिसकी बजह से  मांसपेशियों में काम करने की शक्ति नहीं रहती और वे धीरेधीरे पतली होती जाती हैं

पोलियो से पीड़ित अंग उम्र के साथ ठीक से विकसित भी नहीं हो पाता शरीर के ढाँचे पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। 

हालाँकि वायरस का असर मेरुरज्जु(Spinal Cord) और मस्तिष्क (Brainके किसी भी भाग पर हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में क्षति मेरुरज्जु (Spinal Cord) के निचले हिस्से में होती है

इसका असर अधिकतर पैरों पर पड़ता हैएक या दोनों पैर अपनी ताकत खो बैठते हैं जिससे बचपन में ही विकलांगिता पैदा हो जाती है। (विटामिन डी की कमी के लक्षण जांच और उपचार)

पोलियो के क्या कारण होते हैं?Causes of Polio?

पोलियो का वायरस या तो दूषित हवा से या दूषित पानी और भोजन से फैलता है

यह वायररोगी के गले के ऊपरी हिस्से और उसके पाखाने में बड़ी तादाद में होता है

और  जब रोगी खाँसता या  छींकता तो यह वायरस हवा को दूषित कर देता है

इसी तरह दि वह शौसे निवत्त होने पर ठीक से हाथ नहीं धो पाता तब वह खानपान की चीजें दूषित कर सकता है। 

लेकिन इस वाइरस का ब्बे प्रतिशत मामलों में संक्रमण इतना हलका होता है कि रोग प्रकट नहीं होता और शरीर उससे भीतर ही भीतर खत्म कर देता है। 

पोलियो किस उम्र का रोग है ? What age for  polio disease?

पोलियो किसी भी उम्र में हो सकता हैलेकिन इस देश में 50 प्रतिशत से अधिक मामले जीवन के प्रथम वर्ष में ही हो जाते हैं

अधिकांश अन्य तीन साल की उम्र हो जाते हैंइसके बाद इक्कादुक्का मामले ही नजर आते हैं। 

पोलियो के शुरुआती लक्षण क्या हैं ? What are the early symptoms of polio? 

शुरू में हलका-फुलका बुखार ही होता है। ऐसा लगता  जैसे कोई मामूली सा रोग है आसानी से  ठीक हो जाएगा। और होता भी यही हैथोड़े दिनों में बुखार उतर जाता है और स्थिति सामान्य लगने लगती है

पाँच से दस दिनों बाद जब रोग दुबारा प्रकट होता है तो उस समय सिर्फ बुखार आता है और गर्दन में अकड़न होती है, बल्कि शरीर की कुछ मांसपेशियाँ बिलकुल ढीली पड़ जाती हैं और उन्हें लकवा मार जाता है

Symptoms of Polio

मांसपेशियों में ऐंठन होने के साथसाथ दर्द होता है और मांसपेशियों का फड़कना देखा जा सकता है

चारपाँच दिन में ही लकवा अपना पूरा गंभीर रूप ले लेता हैबिलकुल छोटे बच्चों में लकवे से प्रायः एक टाँग मारी जाती है

थोड़े बड़े (5-15 वर्ष के) बच्चों में या तो बाँह या दोनों टाँगें चली जाती हैं

लेकिन पंद्रह वर्ष के बाद की म्र में रोग हो तो यह सबसे गंभीर होता हैसिर्फ दोनों टाँगें, बल्कि दोनों हाथ भी शक्ति गँवा सकते हैं

साँस लेने में काम आने वाली मांसपेशियाँ भी कभी-कभी  रोग के पंजे में आ जाती तो जीवन पर और  हरा संकमँडराने लगता है। 

पोलियो का परीक्षण कैसे किया जाता है? How to Diagnosis Polio?

पोलियो वायरस के निदान के लिए डॉक्टर आम तौर पर रोगी की शारीरिक जांच करते हैं।

और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि रोगी को फ्लैट सोते समय सिर को उठाने में कठिनाई हो रही है, या गर्दन और पीठ में कोई इम्पेयर्ड रिफलेक्स और कठोरता है।

डॉक्टर पोलियो वायरस की उपस्थिति का निर्धारण करने के लिए रोगी के गले से रोगी के मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal fluid), मल और थूक (Sputum) की लेबोरेटरी टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।

 

पोलियो का क्या इलाज है ? What is Treatment of Polio?

पोलियो के वायरस के खिलाफ अब तक कोदवा इलाज़ नहीं हुई

इसीलिए इलाज के मायने सिर्फ इतने हैं कि दर्द को कम करने के लिए पेरासिटामोल जैसी कोई दवा दी जा सकती है और मांसपेशियों पर गर्म पानी का सेंक किया जा सकता है

अगर रोग बहुत गंभीर हो और साँस लेने में कठिनाई होने लगे तो उस पर पार पाने के लिए जरूर श्वासनली में सुराख बना कर मशीन से साँस जिंदा रखी जाती हैइससे प्राण भी जाते हैं। 

 

क्या लकवा हमेशा के लिए हो जाता है? Does Paralysis problem forever?

पहले चार हफ्तों में जिन मांसपेशियों में जरा भी सुधार होता दिख जाए,उनमें ताकत लौटने की उम्मीद बँधती है

कई क्षतिग्रस्त न्यूरोन समय के साथ अपने से ठीक होते जाते हैंलेकिन छह महीने के बाद आगे सुधार नहीं होता

इसके बाद जो कमजोरी रह जाती है, वह स्थायी होती हैकभीकभी दुर्बल हुए अंग में तेज दर्द भी ठता रह सकता है, जो कई वर्ष शांत रहने के बाद भी तंग कर सकता है। (YouTube)

 

क्या पोलियो से कमजोर हुई टाँग का कोई इलाज हो सकता ? Can there be any treatment for leg weakened from polio?

पोलियो की एक विशेषता है कि उसमें सभी मांसपेशियाँ एक साथ दुर्बल नहीं होतीं कुछ की ताकत बच भी जाती है

कुछ सर्जन इसी का लाभ उठाकर मांसपेशियों में फेर-बदल कर टाँग को फिर से चलने के काबिबना देते हैं

जिन मामलों में क्षति अधिहोती है, उनमें विशेष जूते, कैलिपर और दूसरे सहायक उपकरण देकर आत्मनिर्भर नाने की कोशिश होती है

इसके लिए रोगी को किसी पुनर्स्थापन अस्पताल में दिखाना चाहिए। 

 

पोलियो से कैसे बचा जा सकता है? Prevention for Polio?

सभी बच्चों को डेढ़ महीने की उम्र में पोलियो ड्रॉप्स दी जानी चाहिए,औए उन्हे गे छह से आठ हफ्ते के अंतर से पाँच बार फिर से देना चाहिए

फिर बच्चा जब डेढ़ साल का हो जाए, तो उसे एक बार फिर पोलियो ड्रॉप्स दिए जाने चाहिएइससे बच्चा पोलियो से बचा रहता है। 

 

क्या पोलियो ड्रॉप्स देते समय कोई सावधानी बरतनी होती है ?Special precaution for Polio Vaccine?  

हाँ, अगर बच्चे को बुखार हो, दस्त लगे हों या कोई अन्य संक्रामक रोग हो तो ड्रॉप्स नहीं पिलाना चाहिए

जिस बच्चे को स्टीरॉयड मिल रहे हों या कोई कैंसर हो, उसे भी पोलियो ड्रॉप्स (Polio Vaccine) नहीं दी जाती।(जाने बच्चे की सही से ग्रोथ हार्मोन न होने कारण, लक्षण, टेस्ट और उपचार)

polio treatment
                  Polio Vaccine

पैरालिसिस (लकवा) का घरेलू इलाज Home Remedies for Paralysis?

  •  नीम के तेल की मालिश करने से  ठीक हो लकवा जाता है
  • काली मिर्च पीसकर तेल में मिलाकर लगाने से लकवा ठीक हो जाता है।
  • सोंट और सेंधा नमक पीसकर सुंघाने से लकवा ठीक हो जाता है। 
  • लकवा (Paralysis) होने पर रोगी को कैलशियम अधिक देना चाहिएउबलते हए 1 औंपानी में 2 चम्मच शहद डालकर कुछ ठंडा होने पर रोगी को पिलाते रहने से कैलशियम उचिमात्रा में मिल जाता हैइस प्रकार तीन सप्ताह तक इस प्रयोको करते रहने से लकवाग्रस्त अंग कार्य करने लग जाते हैं
लकवा paralysis के घरेलू उपचार
              लकवा के घरेलू उपचार
  • लकवे में प्याज का उपयोग लाभकारी सिद्ध होता है(जिन रोगियों की हृदय की ड़कबढ़ गई हो और वे हृदय रोगों से बचना चाहते हों तो वे एक नग कच्चा प्याज प्रतिदिन भोजन करते समय खाएं। 
  • यदि किसी रोगी के एक ओर के अंग में लकवा हो गया हो तो 25 ग्राम छिला हुआ लहसुन पीसकर दूध में उबालेंखीर की भांति गाढ़ा होने पर उतारकर ठंडा हो जाने पर प्रतिदिन प्रातःकाल खाएं
  • 250 ग्राम लहसुन को पीसकर आधा किलो सरसों के तेल और 2 किलो जल को किसी लोहे की कड़ाही में डालकर (मिलाकर) गर्म करें
  • जब सारा पानी जल जाए, तब उतारकर ठंडा कर लेंठंडा होने पर छानकर प्रतिदिन इस तेल की मालिश करेंइस प्रकार 1 माके इस प्रयोग से लकवा ठीक हो जाता है
  • तुलसी के पत्ते उबालकर रोगाक्रांत अंग को भाप देने और धोने से पक्षाघात में लाभ होता है अथवा तुलसी के पत्ते और सेंधा नमक को मिलाकर पीस लें, फिर इस मिश्रण को दही में मिलाकर लेप करने से भी आशाजनक लाभ प्राप्त होता है। 

 

 

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