इस टेस्ट से पता चलेगा आपको दिल का दौरा पड़ा था या किसी और बजह से हुआ था सीने में दर्द।

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ट्रोपोनिन क्या है

ट्रोपोनिन हृदय की मांसपेशी फाइबर का एक Components होता है। यह दिल के दौरे (हृदयाघात) का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अहम हृदय मार्कर होता है

हार्ट अटैक पड़ने पर हृदय की मांसपेशियां Damage हो जाती है। मांसपेशियों के damage होने के बाद ट्रोपोनिन ब्लड में उत्पन्न होता है। ट्रोपोनिन का level अधिक होने पर माशपेशियों का ज्‍यादा damage माना जाता है  ट्रोपोनिन स्तर और हृदयाघात एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

हृदय आघात होने के लगभग तीन से चार घंटों के अंदर ट्रोपोनिन का स्‍तर बढ़ने लगता है। ये ट्रोपोनिन के दो प्रकार TROPONIN I तथा TROPONIN T होते हैं। ट्रोपोनिन का स्तर बारह से सोलह घंटों में अपने चरम पर होता है और लगभग दो सप्‍ताह तक बढ़ा हुआ ही रहता है। जब किसी मरीज को सीने में दर्द की शिकायत के बाद चिकित्‍सक को दिखाया जाता है तो सबसे पहले ट्रोपोनिन स्तर का पता लगाने के लिए उसके रक्त की जांच की जाती है। इसके बाद हर चार से छह घंटे में इस जांच को किया जाता है। ट्रोपोनिन का बढ़ा हुआ स्तर हृदय माशपेशियों को हुए अधिक नुकसान की जानकारी देता है।

ट्रोपोनिन टेस्ट से क्या पता चलता है?

जैसे की मैंने ऊपर बता रखा है की जब कोई हार्ट अटैक जैसी प्रॉब्लम आपको लगती जैसे आपको अचानक से बहुत ज्यादा चेस्ट में दर्द होने लगता है और आप डॉक्टर के पास जाते जब आपका डॉक्टर इस टेस्ट को करने के लिए बोल सकते है क्योंकि इस टेस्ट से ये पता लग जाता की आपको सिम्पली किसी और बजह से चेस्ट पैन हुआ या फिर हार्ट अटैक आया अगर इसका लेवल नार्मल आता है तो इसका मतलब सीने में दर्द की कोई और बजह हो सकती और अगर इसका लेवल हाई आता है तो ये पता लग जाता की आपको किसी बजह से हार्ट अटैक ही आया था और इसके बाद आपको ऐसे सीरियस लेना चाहिए।

 

दिल के दौरे के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  1. सांस लेने में तकलीफ / Difficulty in Breathing : दिल का दौरा पड़ने पर दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण सांस लेने में तकलीफ होती हैं। यदि बिना किसी कारण अक्सर थकान होती हैं या हमेशा थका-थका महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। थकान और सांस लेने में तकलीफ महिलाओं में आम होती है और इसकी शुरुआत दिल का दौरा पड़ने के कई दिनों पहले हो जाती हैं।
  2. सीने में दर्द / Chest Pain : यह दल के दौरे का सबसे सामान्य लक्षण हैं। छाती के बीच में बैचेनी, दबाव, दर्द, जकड़न और भारीपन अनुभव करने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कुछ लोगो में जैसे की मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में दिल के दौरे के समय कभी-कभी सीने में दर्द का अनुभव नहीं होता हैं।
  3. अधिक पसीना आना / Profuse Sweating : बिना किसी काम और व्यायाम के सामान्य से ज्यादा पसीना आना ह्रदय की समस्यायों की पूर्व चेतावनी का संकेत हैं। रक्त धमनियों में अवरोध होने के कारण रक्त को दिल तक पहुचाने के लिए बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता हैं। इस कारण अतिरिक्त तनाव में शरीर का तापमान को निचा बनाये रखने के लिए अधिक पसीना आता हैं। अगर आपको हमेशा अन्य व्यक्तिओं के तुलना में अकारण अधिक पसीना आते रहता है और चिपचिपी त्वचा का अनुभव होता हैं तो डॉक्टर का परामर्श लेना चाहिए।
  4. बदनदर्द / Bodyache : दिल के दौरे के समय शरीर के अन्य हिस्सों में भी दर्द हो सकता हैं। बाहों, कमर, गर्दन और जबड़े में दर्द, जकड़न और भारीपन महसूस होता हैं। कभी-कभी यह दर्द शरीर के किसी भी हिस्से में शुरू होकर सीने तक पहुचता हैं। इन लक्षणों को दुर्लक्ष नहीं करना चाहिए और इनकी जांच की जानी चाहिए।
  5. तेज धड़कन / Fast Heart beat : तेज और अनियमित रूप से Pulse और दिल का धड़कन का चलना यह दिल के दौरे का लक्षण हो सकता हैं। यदि यह समस्या अचानक आ जाती है तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  6. जी मचलाना और उलटी / Nausea & Vomiting : कई बार दिल के दौरे के समय अपचन और एसिडिटी के लक्षण नजर आते हैं। इन्हे पेट से जुडी समस्या समझकर दिल को अनदेखा करने से गंभीर दिल का दौरा पड़ सकता हैं। सामान्य रूप से पेट में दर्द, अपचन, सीने में जलन या उलटी की समस्या होने दिल का दौरा पड़ने का संकेत हो सकता हैं। ऐसे में डॉक्टर से जांच करा लेना बेहतर होता हैं।
  7. चिंता / Anxiety : लगातार होनेवाली चिंता और घबराहट को जीवन में होनेवाले विशिष्ट तनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। रात में सोने में कठिनाई होना या घबराहट होना और अचानक उठ जाना यह दिल का दौरा पड़ने से पहले दिखने वाले लक्षण हो सकते हैं।

 

ट्रोपोनिन टेस्ट की नार्मल वैल्यू क्या होती है ?

 

TROPONIN- T, HIGH SENSITIVE, SERUM     – pg/mL<14.00

 TROPONIN I, PLASMA –    ng/mL (< 0.04)

दिल के दौरे से पीड़ित लोगों को निम्नलिखित परहेज़ करने चाहिए। 

  1. दिल के दौरे के बाद 2-3 हफ़्तों तक यौन-संबंध ना बनाए।
  2. धूम्रपान दिल के दौरे का प्रमुख कारण है इसलिए धूम्रपान ना करें। (और पढ़ें: धूम्रपान छोड़ने के लिए घरेलू उपचार)
  3. तली हुई सब्ज़ियां या मांस ना खाएं।
  4. सॉफ्ट ड्रिंक (शीतल पेय) या अन्य पेय जिनमें चीनी हो, उन्हें ना पीयें।
  5. ज़्यादा नमक वाला भोजन ना खाएं। (और पढ़ें: ज्यादा नमक खाने के नुकसान और नमक कम करने का तरीका)
  6. सफ़ेद चावल ना खाएं। (और पढ़ें: ब्राउन राइस या वाइट राइस – अच्छे स्वास्थ्य के लिए किसका सेवन है अधिक फायदेमंद)

दिल के दौरे के लक्षण देखते ही अलर्ट हो जाएं और इलाज करें। 15 मिनट में अगर व्यक्ति को सही इलाज मिल जाता है तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

  • 1-हार्ट पेशेंट को लंबी सांस लेने को कहें और उसके आसपास से हवा आने की जगह छोड़ दें ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके। कई बार ऐसा देखा गया है के घर में या कहीं किसी को अटैक आया और लोग उसको बुरी तरह से चारों तरफ घेर लेते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें के रोगी को ऑक्सीजन लेने के लिए पर्याप्त खुली जगह होना चाहिए।
  • 2- अटैक आने पर पेशेंट को उल्टी आने जैसी फीलिंग होती है ऐसे में उसे एक तरफ मुड़ कर उल्टी करने को कहें ताकि उल्टी लंग्स में न भरने पाए और इन्हें कोई नुकसान ना हो।
  • 3-पेशेंट की गर्दन के साइड में हाथ रखकर उसका पल्स रेट चेक करें यदि पल्स रेट 60 या 70 से भी कम हो तो समझ लें कि ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से गिर रहा है और पेशेंट की हालत बहुत सीरियस है।
    4- एस्प्रिन ब्लड क्लॉट रोकती है इसलिए हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत एस्प्रिन या डिस्प्रिन खिलानी चाहिए ये anticoagulant मेडिसिन्स होती हैं इनसे रोगी के खून में जो खून का थक्का जम जाता बो खुल जाता जिससे क्या होता रोगी के दिल  को फिर से ठीक तरीके से ब्लड और ऑक्सीजन मिलने लगता है।

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